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जातिवाद की तोड़ : व्यवसाय और निवेश की शिक्षा

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जातिवाद की तोड़ : व्यवसाय और निवेश की शिक्षा

Post  nikhil_sablania on Thu Oct 23, 2014 1:47 pm

आधुनिक युग में पूंजी से ही समाप्त होगा जातिवाद

प्रिय मित्रों आज जातिवाद के विरुद्ध व्यवसाय और निवेश को हथियार बनाने की आवश्यकता है। आज आरक्षण का लाभ बहुत कम लोगों को प्राप्त होता है और अधिकांश लोग हजुरी-मजूरी करने पर मजबूर हो जाते है। नौकरीपेशे लोग भी एक बार अपने गुठने टेक देते हैं और शेष मजदूर वर्ग अपनी जरूरतों को कम करते-करते और गरीब होते जाते हैं। इस प्रकार चाहे किसी को आरक्षण मिला हो या नहीं दोनों ही गरीबी की और जा रहे हैं। गरीबी जातिवाद कुछ इस प्रकार उत्पन करती है कि गरीबों का इस प्रकार बहिष्कार किया जाता है कि गरीबों की एक अलग जाती बन जाती है। इस प्रकार जातीगत ढांचा और मजबूत होता जाता है और गरीबी इसको कायम रखती है।

इसलिए यदि भारत में जातिवाद का ढांचा खत्म करना है तो पहले गरीब बनाने की प्रकिर्या को रोकना पड़ेगा। मात्र आरक्षण से गरीब बनने की प्रकिर्या नहीं रुकती। गरीब बनने की प्रकिर्या को रोकने के लिए आवश्यक है वयवसाय एवं निवेश की शिक्षा देना व्यवसाय और निवेश ही वे कार्य हैं जो गरीब बनने की प्रक्रिया को रोकते हैं जिससे जातिवादी मानसिकता कमजोर पड़ती है। अमीरी के आने पर कमजोर वर्गों के लोगों के पास वे संसाधान व सेवाएं उपलब्द्ध होते हैं जिनसे वे अपना और औरों का अधिक विकास कर सकें।

इस प्रकार व्यवसाय और निवेश की शिक्षा से हटाई गई गरीबी दुबारा अपने कदम नहीं फैला पाती। इस शिक्षा को प्राप्त करने के बाद आपके हाथ में जो पूंजी आती है। उससे आप पूंजी का सदुपयोग करना इस प्रकार सीखते हैं कि न केवल आप पूंजी का इस्तेमाल अपने जरूरतों की पूर्ति के लिए करते हैं बल्कि अपनी आने वाली जरूरतों के लिए पूंजी का विस्तार करना भी सीखते है।

जब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने प्रतिनिधित्व दिलाया तब जरूरते और जनसंख्या इतनी ज्यादा नही थी, जितनी ज्यादा कि आज है। आज मात्र नौकरियां बढ़ती हुई जनंख्या की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकती। यदि आज सही कदम नहीं उठाए गए तो गरीबी से उत्पन जातिवाद की समस्याएं और अधिक विकराल रूप ले लेंगी। इस लिए भारत में गरीबी से उत्पन हुए जातिवाद की समस्या को रोकने के लिए आज ही सही दिशा में कदम उठा लेने चाहिए। वे सही कदम है व्यवसाय और निवेश की शिक्षा लेना और इन कार्यों में अग्रसर होना।

शिक्षा का महत्व रुपयों से नहीं आका जाता। यदि सही शिक्षा मिल जाए तो रुपयों का भंडार भी लग सकता है, परन्तु यदि सही शिक्षा नहीं मिल पाए तो भण्डार खाली भी हो सकता है। इसलिए साहस, निश्चय और उमंग के साथ इस शिक्षा को ग्रहण करे और अपने भविष्य के सुनिश्चितकर्ता स्वयं बने। इसके लिए आप नीचे दी गई पुस्तकों को पढ़ और अपने आने वाली पीढ़ी का भविष्य सँवारने के लिए एक नई दिशा की और कदम बढ़ाएं।

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