Mook Naayak मूकनायक
Search
 
 

Display results as :
 


Rechercher Advanced Search

Latest topics
» भारत की मीडिया का जातिवाद Bharat ki Media ka Jativaad
Mon Feb 09, 2015 3:46 pm by nikhil_sablania

» आसानी से प्राप्त करें व्यवसाय और निवेश की शिक्षा
Mon Nov 03, 2014 10:38 pm by nikhil_sablania

» ग्रामीण छात्र को भाया डॉ भीमराव अम्बेडकर का सन्देश: कहा व्यवसायी बनूंगा
Sat Nov 01, 2014 1:17 pm by nikhil_sablania

» जाती की सच्चाई - निखिल सबलानिया
Mon Oct 27, 2014 1:57 pm by nikhil_sablania

» बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर की दलितों के उत्थान के प्रति सच्ची निष्ठा का एक ऐतिहासिक प्रसंग
Mon Oct 27, 2014 1:44 pm by nikhil_sablania

» कैसे बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर ने तैयार की दलितों में से पहले गजेटेड अफसरों की फ़ौज
Mon Oct 27, 2014 1:23 pm by nikhil_sablania

» बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की ईमानदारी का ऐतिहासिक प्रसंग
Mon Oct 27, 2014 1:12 pm by nikhil_sablania

» मिस्टर गांधी का ईसाई विरोध और मुस्लिम पक्ष - डॉ अम्बेडकर
Mon Oct 27, 2014 12:46 pm by nikhil_sablania

» डॉ अम्बेडकर के पुस्तक प्रेम की प्रशंसा
Mon Oct 27, 2014 12:34 pm by nikhil_sablania

Shopmotion


Navigation
 Portal
 Index
 Memberlist
 Profile
 FAQ
 Search
Affiliates
free forum
 

भारत में जातिवाद को जड़ से तब तक नहीं समाप्त किया जा सकता जब तक...

View previous topic View next topic Go down

भारत में जातिवाद को जड़ से तब तक नहीं समाप्त किया जा सकता जब तक...

Post  nikhil_sablania on Thu Oct 23, 2014 2:32 pm

शेखर बंधोपाध्याय द्वारा लिखित पुस्तक 'बंगाल की जाती तत्त्व का इतिहास' के अनुसार ई. स. 500-800 के पूर्व तक बंगाल में कोई जाती विभाजन नहीं था। सम्वंत ई. स. 500-800 के मध्य में वर्ण-व्यवस्था अस्तित्व में थी। सुरेन्द्र बंधोपाध्याय द्वारा लिखित पुस्तक 'जातिवर्ण प्रथा' में 500-800 काल के बाद के काल में सातस्ति/सातसत ब्रामण का परिचय मिलता है। (तो इस प्रकार पता चलता है कि ब्रामणवाद और जाती प्रथा का उदय एक ही काल में हुआ या कहे कि पहले ब्रामण जाती ब्राह्मणवाद के रूप में उभरी और फिर सारे भारत के समाज में जातिवाद का जहर फ़ैल गया।) - उपरोक्त कथन पुस्तक 'बाबासाहेब डॉ आंबेडकर और महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मंडल' पुस्तक से लिए गए है जो कि डॉ आंबेडकर और बंगाल में नेता जोगेन्द्रनाथ मंडल के संबंधों और बंगाल में जातिवाद की स्थिति पर आधारित है।

भारत में जातिवाद को जड़ से तब तक नहीं समाप्त किया जा सकता जब तक उसे समाप्त करने के सिद्धांतों का पूर्ण रूप से अध्यन्न और मनन नहीं किया गया हो। और उन सिद्धांतों को सिखाते हैं डॉ भीमराव आंबेडकर के लेख, उनके भाषण और उनका जीवन व उनके भविष्य के कार्य। तो आप यदि जातिवादी मानसिकता के नहीं है और जातिवाद को भारत से समाप्त करने के इच्छुक हैं तो एक बार डॉ आंबेडकर की पुस्तकों और उनके जीवन का अध्यन्न अवश्य करे। ज्ञान प्राप्ति के लिए और समाज को सही दिशा देने के लिए इन पुस्तकों को खरीदने में और इन्हे पढ़ने में जीवन का कुछ अंश धन व समय के रूप में लगाएं जिससे कि हमारे भारत का समाज एक समझदार समाज बने। हमें विश्व के सामाजिक रूप से मजबूत देशों का मूँह नहीं ताकना है बल्कि अपने भारत के समाज को स्वयं एक मजबूत समाज बनाना है और यह कार्य और कोई नहीं बल्कि हम स्वयं ही पूरा कर सकते है। पर सबसे पहले जरुरत है उसके लिए होम वर्क (Home Work) करने की, स्वयं को बौद्धिक रूप से तैयार करने की और उसके लिए अध्यन्न और मनन करने की। - जय भीम, जय भारत।

डॉ भीमराव अम्बेडकर की लिखी पुस्तकें, भाषण, लेख व उनके जीवन और कार्यों पर 49 पुस्तकें ऑनलाईन आर्डर करें Ya Call Kare: 8527533051. Rs. 7000.
www.cfmedia.in/drambedkarki49pustake7000

avatar
nikhil_sablania

Posts : 104
Join date : 2010-10-23
Age : 38
Location : New Delhi

View user profile http://www.cfmedia.in

Back to top Go down

View previous topic View next topic Back to top


 
Permissions in this forum:
You cannot reply to topics in this forum